अंदाज़-ओ-लहज़ दे देते नीयत का पता

क्या कहूं हाल  अपना  अब जो आमद हुआ है  श्याम बिहारी श्यामल   बेअदब बेक़द्र बेमुरव्वत बेहद हुआ है  आईना मेरा जबसे आदमक़द हुआ है...
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सूरज से पूछियेगा क्या है लाल रंग

सवाल मुल्तवी रख फ़तेह का अभी श्याम बिहारी श्यामल   सच जानेंगे तो आप रह जायेंगे दंग   सूरज से पूछियेगा क्या है लाल रंग   क...
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ज़िंदगी ने बेशक़ ज़ख्म ही ज़ख्म नहीं दिए

सामने मक़सद एक नई दुनिया तराशना श्याम बिहारी श्यामल   पैग़ाम-ए-क़ायनात नए पल संवारना  गड़े ग़म खोज-खोज ऐसे में  क्या  उखाड़ना  ...
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कौन डाल रहा है जान इस नक्श के भीतर

आब-ए-तल्ख़ के बने हैं हमारे हालात श्याम बिहारी श्यामल   ब्रश, रंग, हाथ या दिमाग, किसकी करामात   कैनवास भौंचक, सुन तस्वीर के स...
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दम भर ज़हर बेसाख्ता पिया

दर्द की नदी ने यूं जन्म लिया श्याम बिहारी श्यामल  अहसास को दिल का मुक़ाम दिया है   सरेग़ज़ल हमने उसे ही जिआ है   मन परबत रख...
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