कविता




अक्षय कंदील  

वह तो हृदय प्रदेश का झरना...
कौन रोके यह झरना-बहना...

सांस-सांस में जिसके सवाल... 
कैसे मिटाये निरूत्‍तर काल...

आंचल-परिधि अछोर बड़ी 
महाकवियों की अनंत कड़ी


आदिकवि का करुणा-आस्‍वाद
तुलसी कबीर निराला प्रसाद



ऐसा साधना-बल महान... 
जिन शिराओं में प्रवहमान...

वह शब्‍द-देह स्‍वत: अक्षर...
सदानीर यह प्राण निर्झर... 

हर अंधेरे में अक्षय कंदील... 
ठुंकी रहेगी काल पर कील...

हर क्षण कुछ न कुछ कहेगी... 
कविता थी, है व सदा रहेगी...
               श्‍याम बिहारी श्‍यामल 






             
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About Shyam Bihari Shyamal

Chief Sub-Editor at Dainik Jagaran, Poet, the writer of Agnipurush and Dhapel.
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7 comments:

  1. बहुत उम्दा!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  2. हार्दिक आभार मित्रवर हबीब साहब...

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  3. स्‍नेह-कृपा के लिए आभार आदरणीय डा. रूपचन्‍द्र शास्‍त्री मयंक जी...

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  4. बहुत उम्दा रचना |
    मेरे भी ब्लॉग में पधारें |
    मेरी कविता

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  5. हार्दिक आभार अंजु जी और प्रदीप जी...

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