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शब्‍द श्‍यामल

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काशी का सम्‍मान : ' रेहन पर रग्‍घू ' को साहित्‍य अकादेमी

Shyam Bihari Shyamal 8:32 am Add Comment Edit
बेशक बहुत देर किंतु निस्‍संदेह दुरुस्‍त  श्‍याम बिहारी श्‍यामल           उ पन्‍यास 'रेहन पर रग्‍घू ' के लिए प्रख्‍यात ...
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मंगलेश : यह हौसलाआफजाई है या उलटबांसी

Shyam Bihari Shyamal 1:25 pm 8 Comments Edit
कवि मंगलेश डबराल ( फाइल चित्र : साभार गूगल )    हमारी पीढ़ी को कविता को कविता बनाने की फिक्र रहती थी.इस मानी में कि कविता कवि से छूट क...
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डा. कुमार वि‍मल का स्‍मरण

Shyam Bihari Shyamal 8:10 am 2 Comments Edit
डा. कुमार वि‍मल हमेशा रहेंगे हमारे साथ   श्रद्धांजलि‍ 0  श्‍याम बि‍हारी श्‍यामल           डा. कुमार वि‍मल का जाना हि‍न्‍दी भ...
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नदी : तीन कवि‍ताएं

Shyam Bihari Shyamal 6:09 am 22 Comments Edit
कवि‍ताएं 0 श्‍याम बि‍हारी श्‍यामल नदी - 1 नदी ने जब-जब चाहा गीत गाना रेत हुई कंठ रीते धूल उड़ी खेत हुई नदी -  2 चट्टानों ...
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पुत्र नि‍रंजन देव के जन्‍मदि‍न पर कवि‍ता

Shyam Bihari Shyamal 7:43 am 2 Comments Edit
नि‍रंजन देव सि‍ह अपने माता-पि‍ता सवि‍ता-श्‍यामल और भैया वि‍शाल सि‍ह के साथ।   (  कोलाज-सृजन : ठाकुर शि‍शि‍र कुमार सि‍ह द्वारा जन्‍मदि‍न ...
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      ‘‘ बाबा! इस शरीर से निकलने वाला हर पदार्थ घृणित व दुर्गंधपूर्ण है. आप खुद सोचकर देखिये न! नाक से, कान से, आंखों से य...
  • नदी : तीन कवि‍ताएं
    कवि‍ताएं 0 श्‍याम बि‍हारी श्‍यामल नदी - 1 नदी ने जब-जब चाहा गीत गाना रेत हुई कंठ रीते धूल उड़ी खेत हुई नदी -  2 चट्टानों ...
  • कथा-साहित्य
    ‘‘ इतनी सारी तस्वीरें देख मन में एक सवाल उठा है- मित्र, आप कैसे दार्शनिक हैं, मनन-मंथन वाले या दर्शन-पूजन वाले ? ’’          एकबारगी सी...
  • श्‍यामबिहारी श्‍यामल / कहानी : गीली मिठास
    लाल बाबू ने हमेशा महसूस किया है कि ऊपर की कमाई भीतर से खंधारती चली जाती है... लगातार कमजोर और अपनी ही नजर में चोर बनाती हुई. किसी भ...
  • जिन निस्‍तेज आंखों में आठ दशकों तक चमकते रहे प्रेमचंद
                                                        अलविदा मैकू दादा           सो मवार ( 25 जुलाई 2011 ) को दोपहर में दफ्तर में सविता जी ...
  • वे दिन जो कभी ढले नही
    ★   वे दिन जो कभी ढले नहीं :::: कृष्णानंद जी भोजपुरी के अग्रणी रचनाकारों में हैं. उन्होंने 80 के दशक में लघुपत्रिका 'पुनः' के माध्यम...
  • छत से टपकती माई-बाबूजी की आहट
    ताकतीं दीवारें स्नेह-ममत्व से भर कर श्याम बिहारी श्यामल   बेशक़ ईंट-पत्थरों का ही हमारा भी घर पर फिक्रमंद रहता बहुत आजकल अक्स...
  • जानकी वल्लभ शास्त्री की याद
      जानकीवल्लभ निस्संदेह विरल-विशिष्ट थे, यह नियति का निर्मिति- सत्य है ; उन्होंने बेजुबान और छोटे-से-छोटे प्राणियों को कलेजे से लगाक...
  • गणतंत्र-दिवस पर दिनकर-स्‍मरण
    जश्‍न दर जश्‍न प्रश्‍न पर प्रश्‍न    राष्‍ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनक...
  • आत्‍मबयान
    दो कविताएं 0 श्‍याम बिहारी श्‍यामल  फिर रचूंगा मैं  धार पर ओठंघकर  टेरूंगा जिन्‍दगी  हंकाऊंगा बार-बार  परबत पर प्‍यार  ...

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