DON'T MISS
Loading...
शब्‍द श्‍यामल

समग्र ।। सहज ।। साझा ।। सृजन ।। संसार

  • Home
  • Content
  • Exclusive
  • Literature
  • Tribute
  • Report

Labels

  • Content
  • Exclusive
  • Literature
  • Report
  • Slider
  • Tribute
Home Archive for 2011

काशी का सम्‍मान : ' रेहन पर रग्‍घू ' को साहित्‍य अकादेमी

Shyam Bihari Shyamal 8:32 am Add Comment Edit
बेशक बहुत देर किंतु निस्‍संदेह दुरुस्‍त  श्‍याम बिहारी श्‍यामल           उ पन्‍यास 'रेहन पर रग्‍घू ' के लिए प्रख्‍यात ...
Read More

मंगलेश : यह हौसलाआफजाई है या उलटबांसी

Shyam Bihari Shyamal 1:25 pm 8 Comments Edit
कवि मंगलेश डबराल ( फाइल चित्र : साभार गूगल )    हमारी पीढ़ी को कविता को कविता बनाने की फिक्र रहती थी.इस मानी में कि कविता कवि से छूट क...
Read More

डा. कुमार वि‍मल का स्‍मरण

Shyam Bihari Shyamal 8:10 am 2 Comments Edit
डा. कुमार वि‍मल हमेशा रहेंगे हमारे साथ   श्रद्धांजलि‍ 0  श्‍याम बि‍हारी श्‍यामल           डा. कुमार वि‍मल का जाना हि‍न्‍दी भ...
Read More

नदी : तीन कवि‍ताएं

Shyam Bihari Shyamal 6:09 am 22 Comments Edit
कवि‍ताएं 0 श्‍याम बि‍हारी श्‍यामल नदी - 1 नदी ने जब-जब चाहा गीत गाना रेत हुई कंठ रीते धूल उड़ी खेत हुई नदी -  2 चट्टानों ...
Read More

पुत्र नि‍रंजन देव के जन्‍मदि‍न पर कवि‍ता

Shyam Bihari Shyamal 7:43 am 2 Comments Edit
नि‍रंजन देव सि‍ह अपने माता-पि‍ता सवि‍ता-श्‍यामल और भैया वि‍शाल सि‍ह के साथ।   (  कोलाज-सृजन : ठाकुर शि‍शि‍र कुमार सि‍ह द्वारा जन्‍मदि‍न ...
Read More
सदस्यता लें टिप्पणियाँ ( Atom )
  • Popular Post
  • Video
  • Category

Popular Posts

  • प्रसाद मन्दिर में यादगार शाम // श्‍यामबिहारी श्‍यामल
    अंतरंगता :: वाराणसी के सरायगोवर्द्धन स्‍थि‍त प्रसाद मंदिर में रविवार ( 11 सितम्‍बर  2011 ) को आनन्‍द शंकर प्रसाद के साथ श्‍यामबिहारी श्‍...
  • बनारस पर कहानी :::: चना चबेना गंगजल / श्‍यामबिहारी श्‍यामल
      ‘‘ बाबा! इस शरीर से निकलने वाला हर पदार्थ घृणित व दुर्गंधपूर्ण है. आप खुद सोचकर देखिये न! नाक से, कान से, आंखों से य...
  • श्‍यामबिहारी श्‍यामल / कहानी : गीली मिठास
    लाल बाबू ने हमेशा महसूस किया है कि ऊपर की कमाई भीतर से खंधारती चली जाती है... लगातार कमजोर और अपनी ही नजर में चोर बनाती हुई. किसी भ...
  • इक उम्र बिन आह कैसी !
               सवाल यह भी कि भारतीय संदर्भ को धोखे से बुदबुदाने की तरह दर्ज करने का क्या तुक? क्या तनुज सोलंकी की अंग्रेज़ी दुनिया में हमारे लिए...
  • वे दिन जो कभी ढले नही
    ★   वे दिन जो कभी ढले नहीं :::: कृष्णानंद जी भोजपुरी के अग्रणी रचनाकारों में हैं. उन्होंने 80 के दशक में लघुपत्रिका 'पुनः' के माध्यम...
  • नदी : तीन कवि‍ताएं
    कवि‍ताएं 0 श्‍याम बि‍हारी श्‍यामल नदी - 1 नदी ने जब-जब चाहा गीत गाना रेत हुई कंठ रीते धूल उड़ी खेत हुई नदी -  2 चट्टानों ...
  • जानकी वल्लभ शास्त्री की याद
      जानकीवल्लभ निस्संदेह विरल-विशिष्ट थे, यह नियति का निर्मिति- सत्य है ; उन्होंने बेजुबान और छोटे-से-छोटे प्राणियों को कलेजे से लगाक...
  • गणतंत्र-दिवस पर दिनकर-स्‍मरण
    जश्‍न दर जश्‍न प्रश्‍न पर प्रश्‍न    राष्‍ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनक...
  • कथा-साहित्य
    ‘‘ इतनी सारी तस्वीरें देख मन में एक सवाल उठा है- मित्र, आप कैसे दार्शनिक हैं, मनन-मंथन वाले या दर्शन-पूजन वाले ? ’’          एकबारगी सी...
  • आत्‍मबयान
    दो कविताएं 0 श्‍याम बिहारी श्‍यामल  फिर रचूंगा मैं  धार पर ओठंघकर  टेरूंगा जिन्‍दगी  हंकाऊंगा बार-बार  परबत पर प्‍यार  ...

Video Of Day

Labels

  • Content
  • Exclusive
  • Literature
  • Report
  • Slider
  • Tribute

Popular Posts

  • प्रसाद मन्दिर में यादगार शाम // श्‍यामबिहारी श्‍यामल
    अंतरंगता :: वाराणसी के सरायगोवर्द्धन स्‍थि‍त प्रसाद मंदिर में रविवार ( 11 सितम्‍बर  2011 ) को आनन्‍द शंकर प्रसाद के साथ श्‍यामबिहारी श्‍...
  • बनारस पर कहानी :::: चना चबेना गंगजल / श्‍यामबिहारी श्‍यामल
      ‘‘ बाबा! इस शरीर से निकलने वाला हर पदार्थ घृणित व दुर्गंधपूर्ण है. आप खुद सोचकर देखिये न! नाक से, कान से, आंखों से य...
  • श्‍यामबिहारी श्‍यामल / कहानी : गीली मिठास
    लाल बाबू ने हमेशा महसूस किया है कि ऊपर की कमाई भीतर से खंधारती चली जाती है... लगातार कमजोर और अपनी ही नजर में चोर बनाती हुई. किसी भ...
  • इक उम्र बिन आह कैसी !
               सवाल यह भी कि भारतीय संदर्भ को धोखे से बुदबुदाने की तरह दर्ज करने का क्या तुक? क्या तनुज सोलंकी की अंग्रेज़ी दुनिया में हमारे लिए...
  • वे दिन जो कभी ढले नही
    ★   वे दिन जो कभी ढले नहीं :::: कृष्णानंद जी भोजपुरी के अग्रणी रचनाकारों में हैं. उन्होंने 80 के दशक में लघुपत्रिका 'पुनः' के माध्यम...
  • नदी : तीन कवि‍ताएं
    कवि‍ताएं 0 श्‍याम बि‍हारी श्‍यामल नदी - 1 नदी ने जब-जब चाहा गीत गाना रेत हुई कंठ रीते धूल उड़ी खेत हुई नदी -  2 चट्टानों ...
  • जानकी वल्लभ शास्त्री की याद
      जानकीवल्लभ निस्संदेह विरल-विशिष्ट थे, यह नियति का निर्मिति- सत्य है ; उन्होंने बेजुबान और छोटे-से-छोटे प्राणियों को कलेजे से लगाक...
  • गणतंत्र-दिवस पर दिनकर-स्‍मरण
    जश्‍न दर जश्‍न प्रश्‍न पर प्रश्‍न    राष्‍ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनक...
  • कथा-साहित्य
    ‘‘ इतनी सारी तस्वीरें देख मन में एक सवाल उठा है- मित्र, आप कैसे दार्शनिक हैं, मनन-मंथन वाले या दर्शन-पूजन वाले ? ’’          एकबारगी सी...
  • आत्‍मबयान
    दो कविताएं 0 श्‍याम बिहारी श्‍यामल  फिर रचूंगा मैं  धार पर ओठंघकर  टेरूंगा जिन्‍दगी  हंकाऊंगा बार-बार  परबत पर प्‍यार  ...

Labels

  • Content
  • Exclusive
  • Literature
  • Report
  • Slider
  • Tribute

Archive

  • ►  2025 (1)
    • ►  जून (1)
  • ►  2024 (1)
    • ►  सितंबर (1)
  • ►  2021 (1)
    • ►  अप्रैल (1)
  • ►  2020 (1)
    • ►  मई (1)
  • ►  2019 (163)
    • ►  मई (16)
    • ►  अप्रैल (44)
    • ►  मार्च (42)
    • ►  फ़रवरी (34)
    • ►  जनवरी (27)
  • ►  2018 (90)
    • ►  दिसंबर (29)
    • ►  नवंबर (29)
    • ►  अक्टूबर (19)
    • ►  सितंबर (2)
    • ►  अगस्त (1)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  जून (5)
    • ►  मई (3)
    • ►  अप्रैल (1)
  • ►  2017 (3)
    • ►  दिसंबर (1)
    • ►  अगस्त (2)
  • ►  2016 (2)
    • ►  सितंबर (1)
    • ►  अप्रैल (1)
  • ►  2015 (3)
    • ►  नवंबर (1)
    • ►  अगस्त (2)
  • ►  2014 (4)
    • ►  जून (1)
    • ►  अप्रैल (1)
    • ►  जनवरी (2)
  • ►  2013 (8)
    • ►  दिसंबर (1)
    • ►  नवंबर (3)
    • ►  अक्टूबर (1)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  मई (1)
    • ►  अप्रैल (1)
  • ►  2012 (39)
    • ►  दिसंबर (1)
    • ►  नवंबर (2)
    • ►  अक्टूबर (1)
    • ►  सितंबर (5)
    • ►  अगस्त (1)
    • ►  जुलाई (7)
    • ►  जून (4)
    • ►  मई (6)
    • ►  अप्रैल (4)
    • ►  मार्च (2)
    • ►  फ़रवरी (2)
    • ►  जनवरी (4)
  • ▼  2011 (45)
    • ▼  दिसंबर (3)
      • काशी का सम्‍मान : ' रेहन पर रग्‍घू ' को साहित्‍य अ...
      • मंगलेश : यह हौसलाआफजाई है या उलटबांसी
      • डा. कुमार वि‍मल का स्‍मरण
    • ►  नवंबर (3)
      • नदी : तीन कवि‍ताएं
      • पुत्र नि‍रंजन देव के जन्‍मदि‍न पर कवि‍ता
    • ►  अक्टूबर (7)
    • ►  सितंबर (4)
    • ►  अगस्त (2)
    • ►  जुलाई (6)
    • ►  मई (5)
    • ►  अप्रैल (3)
    • ►  मार्च (6)
    • ►  फ़रवरी (2)
    • ►  जनवरी (4)
  • ►  2010 (1)
    • ►  दिसंबर (1)
Copyright © 2015 शब्‍द श्‍यामल
44GAG