श्याम बिहारी श्यामल की गज़ल 114

संग को संगदिल न होना भारी पड़ा   श्याम बिहारी श्यामल  कैसे असर-ए-अशआर ऐसा बड़ा हो गया             मुर्दा कई दिनों से जो ...
Read More

श्याम बिहारी श्यामल की ग़ज़ल 116

थर-थर कभी तो धू-धू अक्सर   श्याम बिहारी श्यामल  ज़मीं आग की जिस पर कागज़ का घर  जिंदगी ने दिखा दिए क्या-क्या मंज़र  लपकता र...
Read More

श्याम बिहारी श्यामल की ग़ज़ल 113

गुल आते ही हैं गुलशन को बना देने नया  श्याम बिहारी श्यामल क्या देखी-अनदेखी या कैसी कही-अनकही          हमने जो देखी-सुनी वही बस...
Read More

श्याम बिहारी श्यामल की ग़ज़ल

ग़ज़ल वह जो खुशरंग ने गाई है श्याम बिहारी श्यामल ज़माने से यह बुझ कहाँ पाई है  आग वह जो पानी ने लगाई है हम ज़ुबां-ओ-लफ़्ज ...
Read More

श्याम बिहारी श्यामल की ग़ज़ल

मुश्किलों ने मुश्किल बना मुश्किल से बचाया है     श्याम बिहारी श्यामल  हालात ने हर बार झकझोरा है उड़ाया है   तूफां-ए-गम ने हमे...
Read More

श्याम बिहारी श्यामल की ग़ज़ल 09

रवानी-ए-खुशरंग कब से खूनी है  श्याम बिहारी श्यामल  ज़िंदगी याद कर तू मेरी ही चुनी है           अफ़सोस अब तक मेरी एक न सुनी है...
Read More

हर आंख में एक बयान है

रेत निढाल है हैरान है  श्याम बिहारी श्यामल  उसकी आंखों में तो शैतान है  हद है यहां वही निगहबान है  रातों-रात कहां गई दरि...
Read More