ऊंचाई पर मुस्कान एक अड़ी

उल्फत अब भी ज़ादू की छड़ी श्याम बिहारी श्यामल  अपने-आप में दुनिया चाहे जितनी हो बड़ी दिल के सामने आज भी सिर झुकाये वह खड़...
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अंधेरे को जमकर धिक्कारते रहिए

अनहोनी भी घटेगी श्याम बिहारी श्यामल   सरेज़िंदगी होनी अगर होकर रहेगी  बिल्कुल अटल है अनहोनी भी घटेगी    खदेड़ तो रहा...
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शाखों पर लदे हैं जाहिल परिन्दे

सभी समझ रहे हैं यह खेल उनका श्याम बिहारी श्यामल   सत्य की हालत कमज़ोर बता रहे हैं वो   माहौल-ए-फरेब मुफीद बना रहे हैं वो   ...
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कौन दे जवाब यह

जादू है ख्वाब यह श्याम बिहारी श्यामल   लब्बोलुआब तो यह  जादू है ख्वाब यह  सच झूठ, झूठ सच  महज इंतखाब यह सव...
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