नाम पाक़ पहचान भद्दी है

खटक रहा जहन्नुम दुनिया को श्याम बिहारी श्यामल   नाम पाक़ पहचान भद्दी है  सोच-समझ एकदम रद्दी है  खुद को निगलने पर तुला हुआ...
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हवाओं ने धोए निशां-ए-अश्क़ अभी

इसी पल बाज आ ज़िंदगी, जुआ न कर श्याम बिहारी श्यामल  तन्हाइयो, इतने पास भी हुआ न कर  हद में ही रह अपनी हमें छुआ न कर  दुश्...
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काले बादल काबिज़ थे आस्मां-ए-ज़ेहन

कैसी यहां दरपेश पहेली श्याम बिहारी श्यामल   हक़ीक़त-ए-वक़्त-ए-सवालात अज़ीब घड़ी थी  अंगुली उठी एक थी चार अपनी ओर मुड़ी थी  उसस...
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आईना दिखाते हैं खुद पर नज़र रखते हैं

चादर यह बड़ी नहीं पर शफ्फाक ग़ज़ब  श्याम बिहारी श्यामल  हक़-ए-सुखनवरी यहां यूं हम अदा करते हैं    आईना दिखाते हैं खुद पर नज़र रखत...
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ज़िंदगी गुजरी है ऐसी गलिओं से भी

धक्के पहुंचे वज़ूद बिखर गया श्याम बिहारी श्यामल  ज़ेरे अश'आर मेरे सब वही-वही है  बात जो पूरे दिल से इस दिल ने कही है  ...
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मौजें खुद ही राह गढ़ेंगी

संभलेगा न सो खाक होगा श्याम बिहारी श्यामल दुनिया यूं ही राह चलेगी  बनते-बनते  बात  बनेगी मानी कहीं और न खोजिए ...
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