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शब्‍द श्‍यामल

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' अंति‍म दशक की लंबी कविताएं ' ( सम्‍पादक : डा. नागेश्‍वर लाल ) में संकलित

Shyam Bihari Shyamal 6:52 am 8 Comments Edit
  लम्‍बी कविता  हवा में कीलें श्याम बिहारी श्यामल ।।  1  ।। अक्षर-अक्षर हिलते हैं हिल-हिलकर सटते हैं और छिट...
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सांसत में हमारा शब्‍द-संसार

Shyam Bihari Shyamal 7:09 am Add Comment Edit
स्‍मृतिशेष, स्‍मृतियां अशेष ::::: महाकवि जानकीवल्‍लभ   हमारा साहित्य क्षेत्र सांसत और सीलन से इसलिए भरा हुआ है क्योंकि इसे अंधेरे ...
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बनारस पर कहानी :::: चना चबेना गंगजल / श्‍यामबिहारी श्‍यामल

Shyam Bihari Shyamal 7:18 am 10 Comments Edit
  ‘‘ बाबा! इस शरीर से निकलने वाला हर पदार्थ घृणित व दुर्गंधपूर्ण है. आप खुद सोचकर देखिये न! नाक से, कान से, आंखों से य...
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