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शब्‍द श्‍यामल

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Home Archive for मई 2018

कभी थके न रुके यायावर नामवर

Shyam Bihari Shyamal 12:26 pm Add Comment Edit
      अथाहशत्रु नामवर     श्‍याम बिहारी श्‍यामल शब्‍दों की दुनिया में किताबों का घर उसमें रहते जो वह अक्षर नामवर  ...
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बनारस-मय नामवर , नामवर-मय बनारस

Shyam Bihari Shyamal 9:53 am 2 Comments Edit
काशी नगरी जिसने अपनी गोद में तुलसी-कबीर-रैदास से लेकर भारतेंदु-प्रेमचंद-प्रसाद-रामचंद्र शुक्‍ल और हजारी प्रसाद-नज़ीर बनारसी तक ...
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93 में नामवर, करोड़ों में नामवर

Shyam Bihari Shyamal 9:31 am 1 Comment Edit
हिन्दी साहित्य के शलाका-पुरुष डा. नामवर सिंह का आज 93 वां जन्म-दिन     यह जो आग लेसने वाली क़लम, इसके मुरीद हैं हम   श्याम बिहारी श्...
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      ‘‘ बाबा! इस शरीर से निकलने वाला हर पदार्थ घृणित व दुर्गंधपूर्ण है. आप खुद सोचकर देखिये न! नाक से, कान से, आंखों से य...
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    लाल बाबू ने हमेशा महसूस किया है कि ऊपर की कमाई भीतर से खंधारती चली जाती है... लगातार कमजोर और अपनी ही नजर में चोर बनाती हुई. किसी भ...
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  • नदी : तीन कवि‍ताएं
    कवि‍ताएं 0 श्‍याम बि‍हारी श्‍यामल नदी - 1 नदी ने जब-जब चाहा गीत गाना रेत हुई कंठ रीते धूल उड़ी खेत हुई नदी -  2 चट्टानों ...
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      जानकीवल्लभ निस्संदेह विरल-विशिष्ट थे, यह नियति का निर्मिति- सत्य है ; उन्होंने बेजुबान और छोटे-से-छोटे प्राणियों को कलेजे से लगाक...
  • कथा-साहित्य
    ‘‘ इतनी सारी तस्वीरें देख मन में एक सवाल उठा है- मित्र, आप कैसे दार्शनिक हैं, मनन-मंथन वाले या दर्शन-पूजन वाले ? ’’          एकबारगी सी...
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    दो कविताएं 0 श्‍याम बिहारी श्‍यामल  फिर रचूंगा मैं  धार पर ओठंघकर  टेरूंगा जिन्‍दगी  हंकाऊंगा बार-बार  परबत पर प्‍यार  ...
  • जिन निस्‍तेज आंखों में आठ दशकों तक चमकते रहे प्रेमचंद
                                                        अलविदा मैकू दादा           सो मवार ( 25 जुलाई 2011 ) को दोपहर में दफ्तर में सविता जी ...

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