गज़ल लिख रहे हैं खुद वक़्त के ज़ख्मी सवालात




क्या वह ज़द में लेगा हमारे ज़ज्बात

श्याम बिहारी श्यामल 


दोस्त दूर हैं हो पाती कहां उनसे मुलाक़ात
दुश्मन से चाय-काफ़ी पर होती है रोज़ बात

जिस दिन दिल खोल कर हँसता है गज़ब करता है
हमारी राह में उस दिन तो कुछ और मुश्किलात

अंदाज़-ए-खैर-खबर में उसके गज़ब सगापन
क़िस्सा-ए-सयानापन है  उससे यह ताल्लुक़ात

वह जानता है कब कितना मिलाना है कौन रंग
क्या इस तरह ज़द में लेगा वह हमारे ज़ज्बात 

श्यामल क़लम न कागज़ या न ही चमाचम अल्फाज़
गज़ल लिख रहे हैं खुद वक़्त के ज़ख्मी सवालात 


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About Shyam Bihari Shyamal

Chief Sub-Editor at Dainik Jagaran, Poet, the writer of Agnipurush and Dhapel.
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