हौसला भी मुक़म्मल मक़बूल का घोड़ा


ताक़तवर शख्स कभी हक़ में न रहा 

श्याम बिहारी श्यामल 

दुश्वारियों ने कई बार हद को तोड़ा है 
शुक्र है उम्मीदों ने साथ नहीं छोड़ा है 

हालत कहां कैनवास-ए-तस्वीर से अलग 
हौसला भी मुक़म्मल मक़बूल का घोड़ा है 

जब कभी यह लगा चक्रव्यूह में फंस गए 
नई राह ने पास आ मंज़र को मोड़ा है 

पास का ताक़तवर शख्स कभी हक़ में न रहा  
पर इस दुश्मनी ने बार-बार कुछ जोड़ा है 

श्यामल आखिर यह किस तरह मुमकिन हुआ किया 
ग़ज़ल ने साजिशों को मौके पर मरोड़ा है 







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About Shyam Bihari Shyamal

Chief Sub-Editor at Dainik Jagaran, Poet, the writer of Agnipurush and Dhapel.
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1 comments:

  1. पास का ताक़तवर शख्स कभी हक़ में न रहा
    पर इस दुश्मनी ने बार-बार कुछ जोड़ा है
    ...क्या बात👌👌 क्या बात👌👌

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