उल्फत कल नायाब थी कल भी लाज़वाब


आग से मत खेलिए ज़नाब

श्याम बिहारी श्यामल 

क़ाबू अभी कर लीजिए खतरनाक ख्वाब
भूलकर भी आग से मत खेलिए ज़नाब

बेक़ाबू लपटें कभी कुछ छोड़तीं नहीं 
बच न सकेगा आपका भी माल-असबाब

किस मुंह से क्या कहेंगे खुद ही सोचिए
तारीख पास बुला जब मांगेगा ज़वाब

इसे जितनी ज़ल्द समझ लें उतना अच्छा
मुहब्बत से बड़ा नहीं कोई इंक़लाब

श्यामल यह ज़हां जब भी जैसी ले करवट
उल्फत कल नायाब थी कल भी लाज़वाब






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About Shyam Bihari Shyamal

Chief Sub-Editor at Dainik Jagaran, Poet, the writer of Agnipurush and Dhapel.
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2 comments:

  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 27/11/2018
    को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    जवाब देंहटाएं
  2. सुन्दर रचना !!

    क़ाबू अभी कर लीजिए खतरनाक ख्वाब
    भूलकर भी आग से मत खेलिए ज़ना....



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